लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय से लॉर्ड माउंटबेटन

अध्याय 45 के इन इतिहास नोट्स में लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय से लॉर्ड माउंटबेटन तक भारत के प्रमुख वायसरायों के कार्यकाल और महत्वपूर्ण घटनाओं का क्रमबद्ध अध्ययन किया गया है। इसमें दिल्ली राजधानी स्थानांतरण, लखनऊ समझौता, रौलट एक्ट, जलियांवाला बाग, असहयोग आंदोलन, साइमन कमीशन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, गोलमेज सम्मेलन, भारत सरकार अधिनियम 1935, भारत छोड़ो आंदोलन, कैबिनेट मिशन, माउंटबेटन योजना और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। यह सामग्री UPSC, SSC, रेलवे, CTET, BPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी है।

1. लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय (1910–1916 ई.)

  • तृतीय दिल्ली दरबार (12 दिसंबर 1911 ई.): ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम एवं महारानी मैरी के भारत आगमन पर दिल्ली में एक भव्य दरबार का आयोजन हुआ।
  • दो ऐतिहासिक घोषणाएं (1911 ई.): 1. बंगाल विभाजन को रद्द करना: 1905 के कर्जन द्वारा किए गए बंगाल विभाजन को निरस्त किया गया। भाषाई आधार पर प्रांतों का पुनर्गठन करते हुए उड़ीसा एवं बिहार को बंगाल से पृथक कर एक नया प्रांत (बिहार एवं उड़ीसा) बनाया गया, तथा असम को पुनः एक स्वतंत्र कमिश्नरी प्रांत का दर्जा दिया गया।
  • दिल्ली षड्यंत्र केस / हार्डिंग बम कांड (23 दिसंबर 1912 ई.):
  • नए राजधानी नगर (चांदनी चौक) में वायसराय के औपचारिक प्रवेश जुलूस के दौरान लॉर्ड हार्डिंग के हाथी पर बम फेंका गया।
  • संगठन: इसके लिए क्रांतिकारी संगठन अनुशीलन समिति / युगांतर उत्तरदायी था।
  • अभियुक्त: इस कांड में मुख्य योजनाकार रास बिहारी बोस (जो गिरफ्तारी से बचकर जापान भाग गए) तथा सचिन सान्याल थे। मुकदमे में 13 व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया; मास्टर अमीरचंद, भाई बालमुकुंद, अवध बिहारी एवं बसंत कुमार विश्वास को फाँसी की सजा हुई, जबकि दीनानाथ सरकारी गवाह बन गया था।
  • गोपाल कृष्ण गोखले का शिक्षा विधेयक (1910–1911 ई.): गोखले ने भारत में 6 से 10 वर्ष के बच्चों के लिए अनिवार्य एवं निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा लागू करने हेतु इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल में ऐतिहासिक विधेयक प्रस्तुत किया, जिसे ब्रिटिश सरकार ने खारिज कर दिया।
  • प्रथम विश्व युद्ध का प्रारंभ (28 जुलाई 1914 ई.): इसी के समय प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ; हार्डिंग ने बिना भारतीय नेताओं की सहमति के भारत को युद्ध में शामिल घोषित कर दिया।
  • प्रमुख समाचार पत्र: इसी कार्यकाल में फिरोजशाह मेहता ने 'बॉम्बे क्रॉनिकल' (अंग्रेजी) तथा कानपुर से गणेश शंकर विद्यार्थी ने क्रांतिकारी पत्र 'प्रताप' (हिंदी) का प्रकाशन शुरू किया।
  • बीएचयू के कुलाधिपति (1916 ई.): पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के प्रथम कुलाधिपति (Chancellor) लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय नियुक्त हुए।

2. लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916–1921 ई.)

  • लखनऊ समझौता (1916 ई.): अंबिका चरण मजूमदार की अध्यक्षता में कांग्रेस के दोनों धड़ों (नरम दल और गरम दल) का पुनः एकीकरण हुआ तथा कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मध्य ऐतिहासिक 'लखनऊ पैक्ट' संपन्न हुआ।
  • होम रूल लीग आंदोलन (1916 ई.): बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट द्वारा क्रमशः पुणे और मद्रास से होम रूल आंदोलन चलाया गया।
  • मोंटेग्यू घोषणा (20 अगस्त 1917 ई.): भारत सचिव एडविन मोंटेग्यू ने ब्रिटिश संसद में घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार का अंतिम उद्देश्य भारत में उत्तरदायी शासन की क्रमिक स्थापना करना है। इसे राष्ट्रवादियों ने 'अगस्त घोषणा' कहा।
  • भारत सरकार अधिनियम, 1919 (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार):
  • प्रांतीय स्तर पर द्वैध शासन प्रणाली (Dyarchy) लागू की गई (हस्तांतरित एवं आरक्षित विषय)।
  • केंद्र में पहली बार द्विसदनीय विधायिका (राज्य परिषद और केंद्रीय विधानसभा) स्थापित की गई।
  • प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली की शुरुआत हुई तथा सिखों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियन और यूरोपियनों के लिए भी पृथक निर्वाचन का विस्तार किया गया।
  • सिविल सेवा परीक्षा इंग्लैंड एवं भारत में एक साथ कराने की संस्तुति की गई।
  • रौलट एक्ट (मार्च 1919 ई.): सर सिडनी रौलट की अध्यक्षता वाली सेडिशन कमेटी की सिफारिशों पर 'अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम' (रौलट एक्ट - बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील का कानून) पारित हुआ।
  • जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919 ई.):
  • पंजाब के लोकप्रिय नेताओं डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में अमृतसर के जलियांवाला बाग में एकत्र निहत्थी भीड़ पर जनरल रेजिनाल्ड डायर ने गोलियां चलवाईं।
  • परिणाम: रवींद्रनाथ टैगोर ने 'नाइटहुड' तथा गांधीजी ने 'कैसर-ए-हिन्द' की उपाधि त्याग दी। जांच हेतु 'हंटर कमेटी' गठित की गई।
  • खिलाफत एवं असहयोग आंदोलन (1920–1922 ई.): तुर्की के खलीफा के समर्थन में खिलाफत आंदोलन तथा 1 अगस्त 1920 को बाल गंगाधर तिलक के निधन के दिन महात्मा गांधी द्वारा देशव्यापी 'असहयोग आंदोलन' प्रारंभ किया गया।
  • सैडलर विश्वविद्यालय आयोग (1917 ई.): डॉ. माइकल सैडलर की अध्यक्षता में कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं की जांच हेतु गठित हुआ; इसने 12-वर्षीय स्कूली शिक्षा (इंटरमीडिएट) तथा 3-वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम की सिफारिश की।
  • महिला विश्वविद्यालय (1916 ई.): प्रो. डी.के. कर्वे के प्रयासों से पूना में भारत के प्रथम महिला विश्वविद्यालय (SNDT) की स्थापना हुई।
  • भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का गठन (अक्टूबर 1920 ई.): एम.एन. रॉय (मानवेंद्र नाथ रॉय), अवनि मुखर्जी आदि ने सोवियत संघ के ताशकंद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम समूह की स्थापना की।
  • तृतीय अफगान युद्ध (1919 ई.): अमीर अमानुल्लाह के समय लड़ा गया और 'रावलपिंडी की संधि' से समाप्त हुआ।

3. लॉर्ड रीडिंग (1921–1926 ई.) — एकमात्र यहूदी वायसराय

  • मोपला विद्रोह (1921 ई.): केरल के मालाबार तट पर मुस्लिम काश्तकारों (मोपलाओं) द्वारा हिंदू भूस्वामियों (जेन्मी) और ब्रिटिश पुलिस के विरुद्ध उग्र सांप्रदायिक व कृषक विद्रोह हुआ।
  • प्रिंस ऑफ वेल्स की भारत यात्रा (नवंबर 1921 ई.): ब्रिटिश राजकुमार प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन पर पूरे देश में पूर्ण हड़ताल और काले झंडों से बहिष्कार किया गया।
  • चौरी-चौरा कांड एवं आंदोलन वापसी (5 फरवरी 1922 ई.):
  • उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा थाने में भीड़ द्वारा 22 पुलिसकर्मियों को जिंदा जलाए जाने की हिंसक घटना के बाद महात्मा गांधी ने 12 फरवरी 1922 को बारदोली प्रस्ताव द्वारा असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
  • भारत में सिविल सेवा परीक्षा की शुरुआत (1922 ई.): भारत में पहली बार लंदन के साथ-साथ इलाहाबाद में आईसीएस परीक्षा आयोजित की जाने लगी।
  • विश्वभारती विश्वविद्यालय (1921–1922 ई.): रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल) में स्थापित विश्वभारती ने 1922 में औपचारिक कार्य करना प्रारंभ किया (वर्तमान में केंद्रीय विश्वविद्यालय)।
  • स्वराज पार्टी की स्थापना (1 जनवरी 1923 ई.): गया कांग्रेस अधिवेशन (1922) में परिषदों में प्रवेश के मुद्दे पर मतभेद के बाद चित्तरंजन दास (अध्यक्ष) एवं मोतीलाल नेहरू (महासचिव) ने इलाहाबाद में कांग्रेस के भीतर 'स्वराज्य पार्टी' का गठन किया। 1923 के चुनावों में इसे मध्य प्रांत में पूर्ण बहुमत तथा बंगाल में सबसे बड़े दल का स्थान मिला।
  • सांप्रदायिक तनाव: 1925 ई. में दिल्ली में प्रसिद्ध आर्यसमाजी राष्ट्रवादी नेता स्वामी श्रद्धानंद की एक धर्मांध युवक (अब्दुल रशीद) द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई।
  • काकोरी ट्रेन एक्शन (9 अगस्त 1925 ई.): हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के क्रांतिकारियों (रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खाँ, रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी) ने लखनऊ के पास सरकारी खजाना लूटा।
  • प्रेस एवं कानून सुधार: रीडिंग ने 1910 के कठोर 'प्रेस एक्ट' तथा 1919 के 'रौलट एक्ट' को आधिकारिक रूप से निरस्त किया।

4. लॉर्ड इरविन (1926–1931 ई.)

  • साइमन कमीशन का भारत आगमन (3 फरवरी 1928 ई.): 1919 के अधिनियम की समीक्षा हेतु सर जॉन साइमन के नेतृत्व में 7 सदस्यीय 'भारतीय सांविधिक आयोग' बम्बई पहुँचा। सभी सदस्य श्वेत होने के कारण इसका देशव्यापी बहिष्कार हुआ ("साइमन गो बैक")।
  • लाला लाजपत राय की शहादत (1928 ई.): लाहौर में साइमन कमीशन का विरोध करते समय जेम्स स्कॉट के आदेश पर पुलिस लाठीचार्ज में घायल होकर लाला जी शहीद हो गए।
  • भगत सिंह एवं बटुकेश्वर दत्त द्वारा असेंबली बम कांड (8 अप्रैल 1929 ई.): 'पब्लिक सेफ्टी बिल' और 'ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल' के विरोध में तथा लाला जी की शहादत के राष्ट्रीय प्रतिशोध के रूप में केंद्रीय असेंबली में खाली बेंचों पर बम और पर्चे फेंके गए ("बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत है")।
  • जतिन दास की ऐतिहासिक भूख हड़ताल (1929 ई.): लाहौर षड्यंत्र केस के दौरान जेल में भारतीय और ब्रिटिश कैदियों के साथ किए जाने वाले नस्लीय भेदभाव के विरोध में जतिन दास ने 13 जुलाई 1929 को भूख हड़ताल शुरू की; भूख हड़ताल के 64वें दिन (13 सितंबर 1929 ई.) को वे शहीद हो गए।
  • लाहौर अधिवेशन एवं पूर्ण स्वराज (दिसंबर 1929 ई.): पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में रावी नदी के तट पर कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज' का लक्ष्य पारित किया तथा 26 जनवरी 1930 को प्रथम स्वाधीनता दिवस मनाने की घोषणा की।
  • दांडी मार्च एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930 ई.): 12 मार्च से 6 अप्रैल 1930 तक गांधीजी ने साबरमती से दांडी तक 240 मील की यात्रा कर नमक कानून तोड़ा। 5 मई 1930 को गांधीजी को गिरफ्तार किया गया।
  • प्रथम गोलमेज सम्मेलन (12 नवंबर 1930 ई.): लंदन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड की अध्यक्षता में आयोजित हुआ; कांग्रेस ने इसका पूर्ण बहिष्कार किया।
  • गांधी-इरविन समझौता / दिल्ली पैक्ट (5 मार्च 1931 ई.):
  • 25 जनवरी 1931 को गांधीजी बिना शर्त जेल से रिहा किए गए।
  • वायसराय इरविन और गांधीजी के मध्य लंबी वार्ताओं के बाद 5 मार्च 1931 को समझौता हुआ।
  • प्रावधान: कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित करना और द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया। सरकार ने सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसा के दोषियों को छोड़कर) को रिहा करने तथा तटीय ग्रामीणों को व्यक्तिगत उपयोग हेतु नमक बनाने की अनुमति दी।
  • वायसराय भवन का उद्घाटन (1931 ई.): वायसराय भवन (वर्तमान राष्ट्रपति भवन) में रहने वाले प्रथम व्यक्ति लॉर्ड इरविन थे। इस भवन के निर्माण में 17 वर्ष लगे और 1931 में इसका उद्घाटन हुआ; इसके मुख्य वास्तुकार सर एडविन लुटियंस एवं हर्बर्ट बेकर थे।

5. लॉर्ड वेलिंगटन (1931–1936 ई.)

  • द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (7 सितंबर से 1 दिसंबर 1931 ई.): लंदन में आयोजित हुआ; इसमें कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया (एस.एस. राजपूताना जहाज से लंदन गए)। बी.आर. अंबेडकर, सरोजिनी नायडू और मदन मोहन मालवीय भी शामिल हुए। सम्मेलन सांप्रदायिक गतिरोध के कारण पूरी तरह विफल रहा।
  • द्वितीय सविनय अवज्ञा आंदोलन (3 जनवरी 1932 ई.): लंदन से लौटकर गांधीजी ने आंदोलन पुनः प्रारंभ किया, किंतु वेलिंगटन की सरकार ने कठोर अध्यादेश जारी कर गांधीजी समेत सभी कांग्रेस नेताओं को तुरंत जेल में डाल दिया।
  • सांप्रदायिक पंचाट (Communal Award - 16 अगस्त 1932 ई.):
  • ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने दलित वर्गों (अछूतों) को हिंदुओं से पृथक मानकर उनके लिए पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorate) की घोषणा की।
  • पूना समझौता / पूना पैक्ट (24 सितंबर 1932 ई.):
  • मैकडोनाल्ड के पंचाट के विरोध में गांधीजी ने यरवदा जेल (पुणे) में 20 सितंबर को आमरण अनशन शुरू किया।
  • मदन मोहन मालवीय, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और सी. राजगोपालाचारी के प्रयासों से महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के मध्य 24 सितंबर 1932 को 'पूना समझौता' संपन्न हुआ।
  • शर्तें: दलितों के लिए पृथक निर्वाचन की मांग त्याग दी गई; बदले में केंद्रीय विधायिका में 18% सीटें तथा प्रांतीय विधानमंडलों में दलितों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 71 से बढ़ाकर 147 कर दी गई।
  • तृतीय गोलमेज सम्मेलन (नवंबर–दिसंबर 1932 ई.): लंदन में आयोजित; कांग्रेस ने भाग नहीं लिया।
  • बिहार का विनाशकारी भूकंप (1934 ई.): 15 जनवरी 1934 को बिहार में 8.0 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जिसमें मुंगेर, दरभंगा और पटना में भारी जन-धन की क्षति हुई। गांधीजी और राजेंद्र प्रसाद ने राहत शिविर चलाए।
  • भारत सरकार अधिनियम, 1935:
  • केंद्र में 'अखिल भारतीय संघ' और द्वैध शासन का प्रावधान।
  • प्रांतों से द्वैध शासन समाप्त कर 'प्रांतीय स्वायत्तता' (Provincial Autonomy) लागू की गई।
  • बर्मा को भारत से अलग किया गया तथा सिंध और उड़ीसा दो नए प्रांत बने।
  • एक संघीय न्यायालय (Federal Court) तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI - 1935) की स्थापना हुई।
  • विशेष तथ्य: लॉर्ड वेलिंगटन ने 1915 के बम्बई कांग्रेस अधिवेशन में (बम्बई के तत्कालीन गवर्नर के रूप में) भाग लिया था, जिसकी अध्यक्षता सर सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा ने की थी।

6. लॉर्ड लिनलिथगो (1936–1943 ई.) — सबसे लंबा कार्यकाल

  • 1935 के एक्ट के तहत 1937 में 11 प्रांतों में पहली बार आम चुनाव संपन्न हुए।
  • कांग्रेस की विजय: कांग्रेस ने 11 में से 8 प्रांतों में अपनी सरकारें बनाईं (मद्रास, बिहार, संयुक्त प्रांत, मध्य प्रांत, उड़ीसा, बॉम्बे, असम और उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत)। प्रथम 6 प्रांतों में कांग्रेस को पूर्ण स्पष्ट बहुमत मिला था। (बिहार में श्रीकृष्ण सिंह के नेतृत्व में सरकार बनी)।
  • बंगाल में कृषक प्रजा पार्टी-मुस्लिम लीग तथा पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी ने सरकार बनाई।
  • द्वितीय विश्व युद्ध का प्रारंभ (1 सितंबर 1939 ई.): ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों से बिना पूछे भारत को भी युद्धरत देश घोषित कर दिया।
  • मंत्रिमंडलों का त्यागपत्र (अक्टूबर 1939 ई.): कांग्रेस ने युद्ध में शामिल करने का विरोध करते हुए "न कोई भाई, न कोई पाई" का नारा दिया और सभी 8 प्रांतीय मंत्रिमंडलों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया। मुस्लिम लीग ने 22 दिसंबर 1939 को 'मुक्ति दिवस' (Day of Deliverance) के रूप में मनाया।
  • फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना (1 मई 1939 ई.): त्रिपुरी संकट के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देकर सुभाष चंद्र बोस ने 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की नींव रखी।
  • लाहौर प्रस्ताव / पाकिस्तान की मांग (मार्च 1940 ई.): मुस्लिम लीग के 1940 के लाहौर अधिवेशन में आधिकारिक रूप से पृथक 'पाकिस्तान' का प्रस्ताव पारित किया गया।
  • प्रारूप तैयार किया: सिकंदर हयात खाँ ने।
  • प्रस्तुत किया: फजलुल हक ने।
  • समर्थन किया: चौधरी खलीकुज्जमां ने।
  • अगस्त प्रस्ताव (8 अगस्त 1940 ई.): युद्ध में भारतीयों का सहयोग पाने के लिए लिनलिथगो ने 'डोमिनियन स्टेटस' और युद्ध के बाद संविधान सभा का प्रस्ताव रखा, जिसे कांग्रेस और लीग दोनों ने अस्वीकार कर दिया। (इसके विरोध में गांधीजी ने 'व्यक्तिगत सत्याग्रह' शुरू किया; प्रथम सत्याग्रही विनोबा भावे तथा द्वितीय जवाहरलाल नेहरू बने)।
  • क्रिप्स मिशन (मार्च 1942 ई.): युद्ध के बाद डोमिनियन स्टेटस का वादा लेकर सर स्टेफोर्ड क्रिप्स भारत आए। गांधीजी ने इसे "एक टूटते हुए बैंक का पोस्ट-डेटेड चेक" कहा। कांग्रेस की ओर से आधिकारिक वार्ताकार पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं मौलाना अबुल कलाम आजाद थे।
  • भारत छोड़ो आंदोलन / अगस्त क्रांति (9 अगस्त 1942 ई.): 8 अगस्त को बम्बई के ग्वालिया टैंक मैदान में गांधीजी ने "करो या मरो" का नारा दिया। 9 अगस्त की सुबह 'ऑपरेशन जीरो आवर' के तहत सभी शीर्ष नेता गिरफ्तार कर लिए गए (गांधीजी को आगा खाँ पैलेस तथा कांग्रेस कार्यसमिति को अहमदनगर दुर्ग में कैद किया गया; बिहार में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को बांकीपुर जेल भेजा गया)।
  • बंगाल का भीषण अकाल (1943 ई.): सरकारी कुप्रबंधन और चावल के निर्यात के कारण बंगाल में अकाल पड़ा, जिसमें लगभग 30 लाख लोग भुखमरी से मारे गए।

7. लॉर्ड वेवेल (1944–1947 ई.)

  • वेवेल योजना एवं शिमला सम्मेलन (25 जून से 14 जुलाई 1945 ई.):
  • गतिरोध को दूर करने के लिए वेवेल ने शिमला में सर्वदलीय सम्मेलन बुलाया।
  • कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मौलाना अबुल कलाम आजाद ने किया; गांधीजी सम्मेलन में नहीं गए, यद्यपि वे शिमला में उपस्थित रहे।
  • विफलता: मुस्लिम लीग (जिन्ना) ने अड़ियल शर्त रखी कि वायसराय की परिषद के सभी मुस्लिम सदस्यों का चयन केवल मुस्लिम लीग ही करेगी। कांग्रेस ने इसे अपनी राष्ट्रीय धर्मनिरपेक्ष छवि पर हमला माना क्योंकि वह मौलाना आजाद को नामित करना चाहती थी। 14 जुलाई 1945 को वेवेल ने सम्मेलन को विफल घोषित कर दिया।
  • आम चुनाव (1945–1946 ई.): ब्रिटेन में क्लीमेंट एटली की लेबर पार्टी की सरकार बनने के बाद भारत में चुनाव कराए गए। केंद्रीय विधानसभा में कांग्रेस को सामान्य सीटों पर 91.3% वोट मिले, जबकि मुस्लिम लीग ने सभी 30 आरक्षित मुस्लिम सीटें जीतीं।
  • कैबिनेट मिशन (मार्च 1946 ई.):
  • ब्रिटिश कैबिनेट के 3 सदस्य भारत आए: पैथिक लॉरेंस (भारत सचिव - अध्यक्ष), स्टेफोर्ड क्रिप्स (व्यापार बोर्ड अध्यक्ष), एवं ए.वी. अलेक्जेंडर (नौसेना प्रमुख)।
  • मिशन ने पाकिस्तान की प्रत्यक्ष मांग को खारिज कर दिया, प्रांतों का 3 समूहों (A, B, C) में वर्गीकरण किया तथा भारत के लिए एक 'संविधान सभा' और 'अंतरिम सरकार' के गठन की संस्तुति की।
  • प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस (16 अगस्त 1946 ई.): कैबिनेट मिशन द्वारा पाकिस्तान की मांग न माने जाने पर मुस्लिम लीग ने 'डायरेक्ट एक्शन डे' घोषित किया, जिसके बाद कलकत्ता में भीषण सांप्रदायिक दंगे (The Great Calcutta Killings) हुए।
  • अंतरिम सरकार का गठन (2 सितंबर 1946 ई.): पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में 14 सदस्यीय अंतरिम सरकार ने शपथ ली (अक्टूबर में मुस्लिम लीग भी शामिल हुई; लियाकत अली खान वित्त मंत्री बने)।
  • संविधान सभा की प्रथम बैठक (9 दिसंबर 1946 ई.): डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अंतरिम अध्यक्ष बने; 11 दिसंबर को डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए।
  • एटली की ऐतिहासिक घोषणा (20 फरवरी 1947 ई.): ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने हाउस ऑफ कॉमन्स में घोषणा की कि अंग्रेज जून 1948 तक भारत की वास्तविक प्रभुसत्ता भारतीयों को सौंप देंगे।

8. लॉर्ड माउंटबेटन (मार्च 1947 से जून 1948 ई.) — भारत का अंतिम वायसराय

  • नियुक्ति (24 मार्च 1947 ई.): सत्ता के त्वरित हस्तांतरण और विभाजन की देखरेख के लिए लॉर्ड लुई माउंटबेटन को 34वें एवं अंतिम ब्रिटिश गवर्नर-जनरल/वायसराय के रूप में भारत भेजा गया।
  • माउंटबेटन योजना / 3 जून योजना (3 June 1947 Plan):
  • माउंटबेटन ने भारतीय नेताओं से व्यापक विचार-विमर्श के बाद 3 जून 1947 को भारत विभाजन की अंतिम योजना प्रस्तुत की।
  • पंजाब और बंगाल की विधानसभाओं को विभाजन तय करने का अधिकार दिया गया; सिंध, बलूचिस्तान और उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) में जनमत संग्रह कराया गया।
  • सीमांकन हेतु सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो सीमा आयोग (Boundary Commissions) गठित किए गए।
  • भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 (Indian Independence Act, 1947):
  • 4 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद में प्रधानमंत्री एटली द्वारा विधेयक प्रस्तुत किया गया, जिसे 18 जुलाई 1947 को शाही स्वीकृति मिली।
  • इसके अनुसार 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र (डोमिनियन) बने।
  • देशी रियासतों पर ब्रिटिश सर्वोच्चता (Paramountcy) समाप्त कर दी गई और उन्हें भारत या पाकिस्तान में शामिल होने की स्वतंत्रता दी गई।
  • 15 अगस्त 1947 ई.: भारत औपचारिक रूप से स्वतंत्र हुआ।
  • स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल: स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन बने (पंडित जवाहरलाल नेहरू प्रथम प्रधानमंत्री बने)।
  • प्रथम एवं अंतिम भारतीय गवर्नर-जनरल: जून 1948 में माउंटबेटन के इंग्लैंड लौटने के बाद चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (सी. राजगोपालाचारी) स्वतंत्र भारत के प्रथम एवं अंतिम भारतीय गवर्नर-जनरल बने (26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने तक)।

📚 तुलनात्मक कालक्रम तालिका (1910–1947 ई.)

गवर्नर-जनरल / वायसराय कार्यकाल मुख्य ऐतिहासिक मील के पत्थर
लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय 1910–1916 ई. तृतीय दिल्ली दरबार (1911), राजधानी दिल्ली स्थानांतरण (1912), हार्डिंग बम कांड (1912), BHU स्थापना (1916)।
लॉर्ड चेम्सफोर्ड 1916–1921 ई. लखनऊ समझौता (1916), मोंटेग्यू सुधार (1919), रौलट एक्ट एवं जलियांवाला बाग (1919), असहयोग आंदोलन (1920)।
लॉर्ड रीडिंग 1921–1926 ई. मोपला विद्रोह (1921), चौरी-चौरा कांड (1922), स्वराज पार्टी (1923), भारत में ICS परीक्षा प्रारंभ (1922)।
लॉर्ड इरविन 1926–1931 ई. साइमन कमीशन (1928), लाहौर पूर्ण स्वराज (1929), दांडी मार्च (1930), गांधी-इरविन समझौता (1931)।
लॉर्ड वेलिंगटन 1931–1936 ई. द्वितीय व तृतीय गोलमेज सम्मेलन, सांप्रदायिक पंचाट व पूना समझौता (1932), भारत सरकार अधिनियम (1935)।
लॉर्ड लिनलिथगो 1936–1943 ई. 1937 प्रांतीय चुनाव, फॉरवर्ड ब्लॉक (1939), पाकिस्तान प्रस्ताव (1940), क्रिप्स मिशन व भारत छोड़ो (1942)।
लॉर्ड वेवेल 1944–1947 ई. शिमला सम्मेलन (1945), कैबिनेट मिशन (1946), अंतरिम सरकार (1946), एटली की घोषणा (1947)।
लॉर्ड माउंटबेटन 1947–1948 ई. 3 जून योजना, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947, 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता, स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल।