लॉर्ड कैनिंग (1856–1862 ई.) — कंपनी का अंतिम गवर्नर-जनरल एवं प्रथम वायसराय

संवैधानिक एवं प्रशासनिक परिवर्तन

  • 1857 का ऐतिहासिक विद्रोह: इसके कार्यकाल की सबसे युगांतकारी घटना 1857 की क्रांति थी। विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश संसद ने 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' पारित किया।
  • सत्ता का हस्तांतरण: 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद दरबार में महारानी विक्टोरिया का घोषणा-पत्र पढ़ा गया। ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर भारत का प्रशासन सीधे ब्रिटिश क्राउन (ताज) के अधीन लाया गया। कैनिंग कंपनी द्वारा नियुक्त अंतिम गवर्नर-जनरल तथा ब्रिटिश सम्राट के अधीन भारत का प्रथम वायसराय बना।
  • मुगल पद की समाप्ति: 1858 के अधिनियम द्वारा औपचारिक रूप से मुगल सम्राट के पद को समाप्त कर दिया गया।
  • व्यपगत सिद्धांत का अंत: डलहौजी की हड़प नीति (Doctrine of Lapse) को हमेशा के लिए समाप्त कर देशी राजाओं को दत्तक पुत्र गोद लेने का अधिकार पुनः लौटा दिया गया।
  • पोर्टफोलियो प्रणाली (Portfolio System): भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 पारित हुआ, जिसके द्वारा कैनिंग ने विभागीय प्रणाली (कैबिनेट व्यवस्था/पोर्टफोलियो) लागू की। वायसराय को आपातकाल में 6 माह की वैधता वाला अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की शक्ति मिली।
  • महालेखा परीक्षक पद: 1857 में भारत में वित्तीय पारदर्शिता हेतु पहली बार 'महालेखा परीक्षक' (Auditor General) पद सृजित किया गया, जो स्वतंत्रता के बाद नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) कहलाया।
  • वित्तीय सुधार (स्पेक्ट्रम विशेष): जेम्स विल्सन ने 1860 में भारत का पहला आधिकारिक बजट प्रस्तुत किया और 500 रुपये से अधिक आय पर 5% की दर से प्रथम आयकर (Income Tax) लगाया।

न्यायिक, कानूनी एवं सामाजिक सुधार

  • विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856: ईश्वरचंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों से नियम XV (धारा 15) द्वारा विधवा विवाह को पूर्णतः वैध घोषित किया गया और उनसे उत्पन्न संतानों को वैध माना गया। भारत का पहला कानूनी विधवा विवाह 7 दिसंबर 1856 को कलकत्ता में संपन्न हुआ।
  • लेक्स लोकी अधिनियम (Lex Loci Act, 1856): धार्मिक अक्षमता निवारण कानून के तहत व्यवस्था की गई कि धर्म परिवर्तन (जैसे ईसाई धर्म स्वीकार करने) पर किसी भी व्यक्ति को उसकी पैतृक संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।
  • संहिताबद्ध कानून: लॉर्ड मैकाले द्वारा प्रारूपित भारतीय दंड संहिता (IPC) को 1860 में कानूनी मान्यता मिली (1862 से प्रभावी) तथा 1859 में अपराध विधान संहिता (CrPC) लागू की गई।
  • भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम, 1861: पुरानी सुप्रीम कोर्ट और सदर अदालतों को समाप्त कर 1862 में कलकत्ता, मद्रास एवं बंबई में एक-एक उच्च न्यायालय स्थापित किया गया। (नोट: 1866 में आगरा में चौथे उच्च न्यायालय की स्थापना हुई, जिसे बाद में इलाहाबाद स्थानांतरित किया गया)।
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI - 1861 ई.): सर अलेक्जेंडर कनिंघम (भारतीय पुरातत्व के पिता) ने कैनिंग के सहयोग से 1861 में आधुनिक ASI की स्थापना की।
  • विश्वविद्यालयों की स्थापना (1857 ई.): वुड्स डिस्पैच के आधार पर 1857 में कलकत्ता, बम्बई और मद्रास में तीन विश्वविद्यालय स्थापित किए गए।

लॉर्ड एल्गिन प्रथम (1862–1863 ई.)

वहाबी आंदोलन का दमन: पटना को मुख्य केंद्र बनाकर चल रहे ब्रिटिश विरोधी मुस्लिम पुनरुद्धारवादी 'वहाबी आंदोलन' का इसने कड़ाई से सैन्य दमन किया (अंबाला अभियान)।

देहावसान: 1863 ई. में हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में इसकी आकस्मिक मृत्यु हो गई।

लॉर्ड लॉरेंस / जॉन लॉरेंस (1864–1869 ई.)

शानदार निष्क्रियता की नीति (Policy of Masterly Inactivity): अफगानिस्तान के आंतरिक उत्तराधिकार संघर्ष (दोस्त मोहम्मद की मृत्यु के बाद) में इसने किसी भी पक्ष का समर्थन न कर अहस्तक्षेप की नीति अपनाई, जिसे विदेश नीति में 'शानदार निष्क्रियता' कहा गया।

भूटान युद्ध (1865 ई.): 1865 में भूटान ने ब्रिटिश सीमा पर हमला किया; पराजित होकर भूटान ने 'सिनचुला की संधि' (1865) द्वारा 18 असम/बंगाल 'द्वार' अंग्रेजों को सौंपे।

अकाल एवं कैम्पबेल आयोग

  • 1866 ई. में उड़ीसा में भीषण अकाल पड़ा (सूखा व 'मानव-निर्मित भुखमरी' जिसे 'अकाल का सागर' कहा गया) तथा 1868-69 में राजपूताना व बुंदेलखंड में अकाल पड़ा।
  • लॉरेंस ने सर जॉर्ज कैम्पबेल के नेतृत्व में पहले औपचारिक अकाल आयोग (Famine Commission) का गठन किया।
  • प्रथम समुद्री टेलीग्राफ सेवा (1865 ई.): भारत और यूरोप (लंदन) के मध्य फारस की खाड़ी होते हुए पहली बार सबमरीन टेलीग्राफ केबल बिछाई गई।
  • काश्तकारी कानून: किसानों को जमींदारों की मनमानी से बचाने हेतु 1868 में पंजाब टेनेंसी एक्ट तथा अवध टेनेंसी एक्ट पारित करवाए।
  • ग्रीष्मकालीन राजधानी: 1864 में इसने शिमला को आधिकारिक तौर पर ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया।

लॉर्ड मेयो (1869–1872 ई.) — वित्तीय विकेंद्रीकरण एवं प्रथम जनगणना

  • वित्तीय विकेंद्रीकरण का जनक (1870 ई.): 1870 के संकल्प द्वारा मेयो ने केंद्रीय बजट से प्रांतीय सरकारों को जेल, पुलिस, शिक्षा, सड़क और चिकित्सा जैसे विभागों के लिए निश्चित वित्तीय अनुदान देकर वित्तीय विकेंद्रीकरण की नींव रखी।
  • प्रथम जनगणना (1872 ई.): भारत में अंग्रेजों के समय पहली गैर-समकालिक और प्रायोगिक जनगणना 1872 ई. में लॉर्ड मेयो के समय हुई (यद्यपि इसमें 20% क्षेत्र छूट गया था)।
  • कृषि एवं वाणिज्य विभाग (1872 ई.): कृषि सुधारों और सांख्यिकीय आंकड़ों के संकलन हेतु 1872 में एक पृथक कृषि विभाग की स्थापना की।
  • मेयो कॉलेज, अजमेर (1872 ई.): भारतीय देशी राजाओं और राजकुमारों को पश्चिमी शिक्षा व ब्रिटिश संस्कृति में ढालने के लिए अजमेर में 'मेयो कॉलेज' की स्थापना की (राजकोट में राजकुमार कॉलेज भी खोला)।
  • हत्या (8 फरवरी 1872 ई.): अंडमान की सेल्यूलर जेल (पोर्ट ब्लेयर) का निरीक्षण करते समय एक अफगान कैदी शेर अली अफरीदी ने चाकू मारकर लॉर्ड मेयो की हत्या कर दी। मेयो एकमात्र ऐसा वायसराय था जिसकी भारत में हत्या हुई।

लॉर्ड नॉर्थब्रुक (1872–1876 ई.)

  • प्रशासनिक दृष्टिकोण: इसने घोषणा की: "मेरा उद्देश्य करों को हटाना तथा अनावश्यक वैधानिक कार्रवाइयों को बन्द करना है"।
  • बिहार अकाल (1873–74 ई.): बिहार और बंगाल में अकाल पड़ा, किंतु सर रिचर्ड टेम्पल के कुशल प्रबंधन और सरकारी राहत कार्यों के कारण भुखमरी से जनहानि नहीं होने दी गई।
  • मल्हारराव गायकवाड़ की पदच्युति (1875 ई.): बड़ौदा के शासक मल्हारराव गायकवाड़ पर ब्रिटिश रेजिडेंट (कर्नल फेयर) को जहर देने की कोशिश और कुशासन का आरोप लगाकर पद से हटाकर मद्रास निर्वासित कर दिया गया।
  • कूका आंदोलन का दमन (1872 ई.): पंजाब में राम सिंह कूका के नेतृत्व में उभरे आंदोलन को दबाया गया और राम सिंह को रंगून निर्वासित किया गया।
  • स्वेज नहर का खुलना (1869/70s): स्वेज नहर के पूरी तरह व्यापारिक उपयोग में आने से भारत और ब्रिटेन के बीच दूरी व परिवहन समय घट गया, जिससे ब्रिटिश तैयार माल का आयात बढ़ा।
  • त्यागपत्र: अफगानिस्तान के अमीर शेर अली पर ब्रिटिश रेजिडेंट थोपने के लंदन के दबाव का विरोध करते हुए नॉर्थब्रुक ने 1876 में इस्तीफा दे दिया।

लॉर्ड लिटन (1876–1880 ई.) — प्रतिक्रियावादी एवं दमनकारी शासन

  • साहित्यिक उपनाम: लिटन एक विख्यात कवि, उपन्यासकार और निबंधकार था, जो साहित्य जगत में 'ओवन मेरिडिथ' (Owen Meredith) के नाम से लिखता था।
  • भीषण अकाल एवं रिचर्ड स्ट्रेची आयोग (1878 ई.): 1876-78 में मद्रास, बम्बई, मैसूर, हैदराबाद और पंजाब में भीषण अकाल पड़ा, जिसमें लगभग 50 लाख लोग मारे गए। लिटन ने राहत कार्यों की रूपरेखा हेतु सर रिचर्ड स्ट्रेची की अध्यक्षता में 1878 में 'अकाल आयोग' नियुक्त किया, जिसने 'अकाल संहिता' (Famine Code) की सिफारिश की।
  • प्रथम दिल्ली दरबार (1 जनवरी, 1877 ई.): जब देश अकाल की आग में जल रहा था, लिटन ने कलकत्ता के स्थान पर दिल्ली में भव्य दरबार आयोजित कर महारानी विक्टोरिया को 'कैसर-ए-हिन्द' (Empress of India) की उपाधि से सम्मानित किया। (कलकत्ता की एक पत्रिका ने लिखा: "जब नीरो बांसुरी बजा रहा था, तब रोम जल रहा था" )।

वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (मार्च 1878 ई. - देसी भाषा समाचार पत्र अधिनियम)

भारतीय भाषाओं के राष्ट्रवादी समाचार पत्रों (विशेषकर ईश्वरचंद्र विद्यासागर और द्वारकानाथ विद्याभूषण द्वारा संपादित 'सोम प्रकाश') की आवाज दबाने हेतु यह 'गैग-एक्ट' (मुंह बंद करने वाला कानून) पारित किया गया।

शर्तें: मजिस्ट्रेट को अधिकार था कि वह किसी भी भारतीय भाषा के अखबार से बॉन्ड भरवा ले और आपत्तिजनक सामग्री छपने पर बिना अपील के प्रिंटिंग प्रेस सहित पूरी संपत्ति जब्त कर ले।

'अमृत बाजार पत्रिका' (शिशिर कुमार घोष) इस कानून से बचने के लिए रातों-रात बंगाली से अंग्रेजी संस्करण में बदल गई।

नोट: 'पायनियर' (Pioneer) नामक आंग्ल-भारतीय अखबार ने इस दमनकारी कानून का खुला समर्थन किया था।

भारतीय शस्त्र अधिनियम (Indian Arms Act, 1878): भारतीयों के लिए बिना लाइसेंस हथियार (बंदूक, तलवार आदि) रखना, बेचना या ले जाना दंडनीय अपराध बना दिया गया (यह नियम गोरों/यूरोपीय नागरिकों पर लागू नहीं था)।

सिविल सेवा आयु में कटौती: भारतीयों को ICS से बाहर रखने के लिए परीक्षा में प्रवेश की अधिकतम आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 19 वर्ष कर दी गई। (ऐतिहासिक क्रम: 1857 में 23 वर्ष → 1859 में 22 वर्ष → 1866 में 21 वर्ष → 1878 में 19 वर्ष)।

द्वितीय आंग्ल-अफगान युद्ध (1878–1880 ई.): लिटन की आक्रामक 'अग्रगामी नीति' (Forward Policy) के कारण यह खर्चीला और निरर्थक युद्ध हुआ।

मुस्लिम एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज, अलीगढ़ (1877 ई.): सर सैयद अहमद खाँ द्वारा स्थापित इस कॉलेज की आधारशिला स्वयं लिटन ने रखी थी।

लॉर्ड रिपन (1880–1884 ई.) — सबसे लोकप्रिय एवं उदारवादी वायसराय

  • भारत का उद्धारक: ब्रिटिश समाज सुधारक फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने लॉर्ड रिपन को 'भारत के उद्धारक' (The Saviour of India) की संज्ञा दी।
  • प्रेस की स्वतंत्रता (1882 ई.): ब्रिटिश प्रधानमंत्री विलियम ग्लैडस्टोन के परामर्श पर रिपन ने 1882 में लिटन के कुख्यात 'वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट' को निरस्त कर दिया तथा भारतीय व अंग्रेजी अखबारों को समान अधिकार दिए।

स्थानीय स्वशासन का मैग्नाकार्टा (18 मई, 1882 ई.)

  • रिपन को 'भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक' (Father of Local Self-Government) माना जाता है।
  • 18 मई 1882 के ऐतिहासिक प्रस्ताव द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जिला बोर्ड और तालुकों में उप-जिला बोर्ड तथा नगरों में नगरपालिकाओं (Municipalities) का गठन किया गया, जिनमें गैर-सरकारी निर्वाचित सदस्यों का बहुमत और भारतीय अध्यक्ष की व्यवस्था की गई।

प्रथम नियमित एवं दशकीय जनगणना (1881 ई.)

  • 1881 ई. में डब्ल्यू.सी. प्लॉडन के नेतृत्व में भारत की पहली पूर्ण, समकालिक और नियमित जनगणना कराई गई।
  • इसके बाद से प्रति 10 वर्ष के अंतराल पर जनगणना की जाने लगी। (1881 में हैदराबाद और राजपूताना को सम्मिलित नहीं किया गया था)।

प्रथम कारखाना अधिनियम (First Factory Act, 1881)

  • बाल श्रम सुधार हेतु पारित।
  • 7 वर्ष से कम आयु के बच्चों के काम करने पर पूर्ण प्रतिबंध।
  • 7 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए कार्य के घंटे अधिकतम 9 घंटे प्रतिदिन तय किए गए तथा महीने में 4 दिन का अवकाश अनिवार्य किया गया।
  • (यह अधिनियम चाय, कॉफी और नील के बागानों पर लागू नहीं था)।

हंटर शिक्षा आयोग (3 फरवरी, 1882 ई.)

  • वुड्स डिस्पैच की प्रगति की समीक्षा हेतु सर विलियम हंटर की अध्यक्षता में प्रथम शिक्षा आयोग गठित हुआ।
  • इसने प्राथमिक शिक्षा के विस्तार व सुधार का उत्तरदायित्व स्थानीय निकायों (नगरपालिकाओं व जिला बोर्डों) को सौंपने और माध्यमिक स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) को बढ़ावा देने की सिफारिश की।
  • सिविल सेवा सुधार: लिटन द्वारा घटाई गई सिविल सेवा प्रवेश की अधिकतम आयु को 19 वर्ष से बढ़ाकर पुनः 21 वर्ष कर दिया।

इल्बर्ट बिल विवाद एवं 'श्वेत विद्रोह' (1883–1884 ई.)

  • वायसराय की परिषद के विधि सदस्य सर सी.पी. इल्बर्ट ने 2 फरवरी 1883 को एक विधेयक प्रस्तुत किया।
  • उद्देश्य: भारतीय जिला मजिस्ट्रेटों और सत्र न्यायाधीशों को यूरोपीय (श्वेत) अपराधियों के मुकदमों की सुनवाई करने का अधिकार देकर न्यायिक भेदभाव समाप्त करना।
  • परिणाम: भारत और लंदन के अंग्रेजों ने इसे 'नस्लीय अपमान' मानकर तीव्र आंदोलन छेड़ दिया, जिसे 'श्वेत विद्रोह' (White Mutiny) कहा गया। विवश होकर सरकार को संशोधन करना पड़ा कि यूरोपीय अभियुक्त 50% यूरोपीय जूरी की मांग कर सकते हैं। इस घटना ने भारतीयों को संगठित राष्ट्रवाद की अनिवार्यता का पाठ पढ़ाया।

लॉर्ड डफरिन (1884–1888 ई.)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (28 दिसंबर, 1885 ई.)

सेवानिवृत्त अंग्रेज आईसीएस अधिकारी ए.ओ. ह्यूम (Allan Octavian Hume) के प्रयासों से बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना हुई। प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी बने (72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया)।

(डफरिन ने कांग्रेस को शुरू में सुरक्षा वाल्व माना, किंतु बाद में इसे "अल्पसंख्यक सूक्ष्मदर्शी वर्ग" (Microscopic Minority) कहकर मजाक उड़ाया)।

तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध (1885–1888 ई.): बर्मा के राजा थिबॉ को बंदी बनाकर 1885 में पराजित किया गया और 1 जनवरी 1886 को बर्मा का अंतिम रूप से ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया गया।

काश्तकारी अधिनियम: किसानों को संरक्षण देने के लिए बंगाल टेनेंसी एक्ट (1885), अवध टेनेंसी एक्ट (1886) और पंजाब टेनेंसी एक्ट (1887) पारित किए गए।

ग्वालियर किले की वापसी: डफरिन ने ग्वालियर का ऐतिहासिक किला सिंधिया शासक को वापस लौटाया।

लॉर्ड लैंसडाउन (1888–1894 ई.)

डूरंड रेखा का निर्धारण (1893 ई.): भारत (वर्तमान पाकिस्तान) और अफगानिस्तान के मध्य अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा तय करने के लिए सर हेनरी मॉर्टिमर डूरंड के नेतृत्व में 'डूरंड रेखा' खींची गई।

द्वितीय कारखाना अधिनियम (Second Factory Act, 1891)

महिलाओं के काम के घंटे 11 घंटे प्रतिदिन सीमित किए गए और उनके रात्रि कार्य (रात 8 से सुबह 5 बजे) पर रोक लगाई गई।

बच्चों (9 से 14 वर्ष) के लिए कार्य के घंटे घटाकर 7 घंटे प्रतिदिन किए गए।

सभी श्रमिकों के लिए सप्ताह में एक दिन (रविवार) का अनिवार्य अवकाश तय किया गया।

भारतीय परिषद अधिनियम, 1892: केंद्रीय और प्रांतीय परिषदों में पहली बार गैर-सरकारी सदस्यों के लिए अप्रत्यक्ष निर्वाचन (सिफारिश पद्धति) और बजट पर बहस करने (प्रश्न पूछने, किंतु मतदान न करने) का सीमित अधिकार मिला।

एज ऑफ कंसेंट एक्ट (Age of Consent Act, 1891): पारसी सुधारक बी.एम. मालाबारी के प्रयासों से लड़कियों के विवाह की न्यूनतम सहमति आयु 10 वर्ष से बढ़ाकर 12 वर्ष तय की गई (बाल गंगाधर तिलक ने इसे सामाजिक मामलों में ब्रिटिश हस्तक्षेप मानकर विरोध किया था)।

लॉर्ड एल्गिन द्वितीय (1894–1899 ई.)

विवादास्पद साम्राज्यवादी वक्तव्य: इसने उद्घोषणा की: "भारत को तलवार के बल पर विजित किया गया है और तलवार के बल पर ही इसकी रक्षा की जाएगी"।

अकाल एवं लायल आयोग (1896–1898 ई.): उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और मध्य प्रदेश में भीषण अकाल पड़ा। सर जेम्स लायल की अध्यक्षता में द्वितीय अकाल आयोग गठित हुआ।

ब्यूबोनिक प्लेग एवं चापेकर बंधु (1897 ई.): 1896-97 में पूना और बंबई में प्लेग फैला। पूना के प्लेग कमिश्नर वाल्टर चार्ल्स रैंड और लेफ्टिनेंट आयर्स्ट द्वारा महिलाओं व परिवारों के उत्पीड़न से आक्रोशित होकर दामोदर चापेकर और बालकृष्ण चापेकर ने 22 जून 1897 को दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी (यह भारत में पहली राजनीतिक हत्या मानी जाती है)।

लॉर्ड कर्जन (1899–1905 ई.) — प्रशासनिक कार्यकुशलता एवं बंगाल का विभाजन

कर्जन घोर साम्राज्यवादी और प्रशासनिक कार्यकुशलता (Efficiency) का कट्टर समर्थक था, जिसने कांग्रेस को शांतिपूर्ण मृत्यु में मदद करने की इच्छा जताई थी।

प्रशासनिक आयोग एवं सुधार

अन्य कार्य

  • सैन्य अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु क्वेटा (बलूचिस्तान) में एक सैन्य स्टाफ कॉलेज खोला।
  • महारानी विक्टोरिया की स्मृति में कलकत्ता में संगमरमर का विक्टोरिया मेमोरियल हॉल बनवाया।
  • तिब्बत में रूसी प्रभाव रोकने के लिए 1904 में कर्नल फ्रांसिस यंगहसबैंड के नेतृत्व में एक सैन्य अभियान ल्हासा भेजा।

बंगाल का विभाजन (Partition of Bengal - 1905 ई.)

निर्णय एवं घोषणा: कर्जन ने राष्ट्रवाद की उभरती रीढ़ (बंगाल) को तोड़ने के लिए सांप्रदायिक आधार पर विभाजन की योजना बनाई। 20 जुलाई, 1905 को शिमला में घोषणा की गई।

प्रभावी तिथि: 16 अक्टूबर, 1905 को विभाजन आधिकारिक रूप से लागू हुआ। (इस दिन बंगाल में शोक दिवस, राखी दिवस और उपवास मनाया गया; 'वंदे मातरम' आंदोलन का नारा बना)।

विभाजन का स्वरूप

  • पूर्वी बंगाल एवं असम: ढाका मुख्यालय; मुस्लिम बहुल; लेफ्टिनेंट गवर्नर ब्लूमफील्ड फुलर बने।
  • पश्चिमी बंगाल: कलकत्ता मुख्यालय (बंगाल, बिहार और उड़ीसा); हिंदू बहुल; लेफ्टिनेंट गवर्नर सर एंड्रयू फ्रेजर बने।
  • किचनर विवाद एवं इस्तीफा: वायसराय की कार्यकारी परिषद में 'सैन्य सदस्य' (Military Member) के अधिकार को लेकर कर्जन का प्रधान सेनापति लॉर्ड किचनर से विवाद हो गया। भारत सचिव (सेंट जॉन ब्रॉडरिक) ने किचनर का पक्ष लिया, जिसके विरोध में क्षुब्ध होकर अगस्त 1905 में कर्जन ने इस्तीफा दे दिया।

लॉर्ड मिंटो द्वितीय (1905–1910 ई.) — पृथक निर्वाचन एवं सांप्रदायिकता का बीज

मुस्लिम लीग की स्थापना (30 दिसंबर, 1906 ई.)

  • अक्टूबर 1906 में आगा खाँ के नेतृत्व में 'शिमला प्रतिमंडल' ने मिंटो से भेंट कर मुसलमानों के लिए अलग राजनीतिक दर्जे की मांग की।
  • 30 दिसंबर 1906 को ढाका के नवाब सलीम उल्लाह खाँ और नवाब वकार-उल-मुल्क के नेतृत्व में ढाका में 'अखिल भारतीय मुस्लिम लीग' की स्थापना हुई, जिसके प्रथम अध्यक्ष आगा खाँ बने।

कांग्रेस का सूरत विभाजन (दिसंबर 1907 ई.)

रास बिहारी घोष की अध्यक्षता वाले सूरत अधिवेशन में स्वदेशी आंदोलन की कार्यपद्धति को लेकर कांग्रेस दो फाड़ हो गई—गरम दल (तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल) और नरम दल (गोखले, फिरोजशाह मेहता)।

दमनकारी कानून

  • राजद्रोहात्मक सभा अधिनियम (Seditious Meetings Act, 1907)।
  • भारतीय विस्फोटक पदार्थ अधिनियम (1908)।
  • समाचार पत्र अधिनियम (Newspaper Incitement to Offences Act, 1908): आपत्तिजनक लेखों पर प्रेस जब्त करने का अधिकार मिला।
  • तिलक को कारावास (1908 ई.): केसरी में क्रांतिकारी लेख लिखने के कारण 22 जुलाई 1908 को बाल गंगाधर तिलक को 6 वर्ष के कठोर कारावास की सजा देकर बर्मा की मांडले जेल भेजा गया।
  • कार्यकारिणी में प्रथम भारतीय नियुक्ति: सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा (एस.पी. सिन्हा) को वायसराय की कार्यकारी परिषद में प्रथम भारतीय 'विधि सदस्य' के रूप में नियुक्त किया गया।

मार्ले-मिंटो सुधार (भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 ई.)

  • भारत सचिव जॉन मार्ले और वायसराय लॉर्ड मिंटो द्वितीय द्वारा तैयार किया गया।
  • सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व (Separate Electorate): भारत के इतिहास में पहली बार धर्म के आधार पर मुसलमानों के लिए 'पृथक निर्वाचन मंडल' की व्यवस्था लागू की गई, जहाँ मुस्लिम उम्मीदवार को केवल मुस्लिम मतदाता ही चुन सकते थे।
  • मिंटो की टिप्पणी: लॉर्ड मिंटो ने लॉर्ड मार्ले को पत्र में लिखा था: "हम नाग के दांत बो रहे हैं, और इसका फल अत्यंत भीषण होगा।" (इसी कारण लॉर्ड मिंटो द्वितीय को 'भारत में सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक' कहा जाता है)।
  • आंग्ल-रूसी सम्मेलन (1907 ई.): 1907 में ब्रिटेन और रूस के बीच समझौता हुआ जिसने मध्य एशिया (ईरान, अफगानिस्तान, तिब्बत) में उनके प्रभाव क्षेत्रों का बंटवारा कर यूरोप में त्रिगुट गठबंधन का मार्ग प्रशस्त किया।
आयोग / सुधार वर्ष अध्यक्ष / प्रमुख मुख्य उद्देश्य / वैधानिक परिणाम PDF
मुद्रा अधिनियम 1899 ई. — ब्रिटिश पाउंड/स्वर्ण मुद्रा को भारत में कानूनी मुद्रा घोषित किया गया।
कलकत्ता कॉर्पोरेशन एक्ट 1899 ई. — नगर निगम में भारतीयों की निर्वाचित संख्या घटाकर सरकारी नियंत्रण बढ़ाया।
अकाल आयोग 1900 ई. सर एंटनी मैकडॉनल राहत कार्यों में तीव्रता और अकाल आयुक्त की नियुक्ति की सिफारिश।
सिंचाई आयोग 1901 ई. सर कॉलिन स्कॉट मॉनक्रीफ झेलम और अन्य नहर प्रणालियों के विस्तार की रूपरेखा तैयार की।
रेलवे आयोग 1901 ई. थॉमस रॉबर्टसन रेलवे बोर्ड का गठन (1905) और रेलवे के व्यावसायिक विकास पर बल।
पुलिस आयोग 1902 ई. सर एंड्रयू फ्रेजर प्रांतों में CID (आपराधिक जांच विभाग) की स्थापना और भर्ती सुधार।
विश्वविद्यालय आयोग 1902 ई. सर थॉमस रैले 1904 का 'भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम' पारित; उच्च शिक्षा पर सरकारी नियंत्रण कड़ा किया।
प्राचीन स्मारक संरक्षण एक्ट 1904 ई. — ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा व मरम्मत हेतु 50,000 पाउंड स्वीकृत; भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) का पुनर्गठन।
सहकारी उधार समिति एक्ट 1904 ई. — किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाने हेतु उचित ब्याज पर सहकारी ऋण व कृषि बैंकों की स्थापना।
कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) 1905 ई. — बिहार के दरभंगा (समस्तीपुर/पूसा) में फिप्स के अनुदान से कृषि अनुसंधान प्रयोगशाला खोली गई।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • लॉर्ड कैनिंग: 1857 के विद्रोह के बाद भारत सरकार अधिनियम 1858; कंपनी शासन का अंत और प्रथम वायसराय।
  • लॉर्ड मेयो: वित्तीय विकेंद्रीकरण और 1872 की पहली गैर-समकालिक जनगणना से संबंधित।
  • लॉर्ड रिपन: स्थानीय स्वशासन, वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट का निरसन और हंटर शिक्षा आयोग।
  • लॉर्ड लिटन: वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट, आर्म्स एक्ट और द्वितीय आंग्ल-अफगान युद्ध।
  • लॉर्ड कर्जन: प्रशासनिक आयोग/सुधार और 1905 का बंगाल विभाजन।
  • लॉर्ड मिंटो द्वितीय: 1906 मुस्लिम लीग की स्थापना, 1907 सूरत विभाजन और 1909 मार्ले-मिंटो सुधार के अंतर्गत पृथक निर्वाचन।