एस.सी.ई.आर.टी. (SCERT), बिहार के डी.एल.एड. (D.El.Ed.) पाठ्यक्रम के आधिकारिक पत्र "S-5 : विद्यालय में स्वास्थ्य, योग एवं शारीरिक शिक्षा" के द्वितीय इकाई "खेल एवं खेलकूद" के आठवें अध्याय "कबड्डी (Kabaddi)" का संपूर्ण प्रामाणिक एवं परीक्षा-उन्मुख विस्तृत नोट्स नीचे दिया गया है।
1. कबड्डी का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य व क्षेत्रीय नाम (History & Regional Names)
कबड्डी भारत का एक अत्यंत प्राचीन, पारम्परिक और लोकप्रिय खेल है। इस खेल का जन्मदाता विधिक रूप से महाराष्ट्र राज्य को माना जाता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे भिन्न-भिन्न क्षेत्रीय नामों से पुकारा जाता रहा है:
- पश्चिमी भारत: इसे 'हू-तू-तू' के नाम से जाना जाता है।
- पूर्वी भारत: यहाँ इसे 'हा-डू-डू' कहा जाता है।
- दक्षिण भारत: यहाँ इस खेल को 'चण्डू-गुडू' नाम से विधिक पहचान प्राप्त है।
- उत्तरी भारत: इस क्षेत्र में इसे सार्वभौमिक रूप से 'कबड्डी' कहा जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय व एशियाई खेल इतिहास: सन् 1936 के बर्लिन ओलम्पिक में हनुमान व्यायाम प्रसारक मण्डल, अमरावती द्वारा पहली बार कबड्डी का वैश्विक प्रदर्शन किया गया। सन् 1962 में इसे भारतीय विद्यालय खेल प्रतियोगिताओं में शामिल किया गया। एशियाई खेल इतिहास में सन् 1982 के नई दिल्ली में आयोजित 9वें एशियाई खेलों में इसे प्रदर्शन मैच के रूप में शामिल किया गया और सन् 1990 के बीजिंग (चीन) 11वें एशियन गेम्स में इसे विधिक प्रतियोगिता के रूप में सम्मिलित किया गया, जहाँ भारत ने स्वर्ण पदक जीता।
---2. कबड्डी के प्रकार व खिलाड़ियों की विधिक संख्या (Types & Players)
आरम्भ में यह खेल अमर, गामिनी और संजीवनी के रूप में खेला जाता था। समकालीन समय में यह मुख्य रूप से दो प्रकार से खेला जाता है:
- नेशनल कबड्डी (National Style): यह पूरे भारत व एशियन गेम्स में खेला जाता है, जो मैट या सैंड कोर्ट पर आयोजित होता है।
- सर्किल कबड्डी (Circle Style): इसे 'पंजाब कबड्डी' के नाम से भी जाना जाता है, जो एक वृत्ताकार मैदान पर खेला जाता है।
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3. तकनीकी शब्दावली एवं विधिक नियम (Technical Terms & Rules)
- कॉन्ट (Cant): एक ही श्वास प्रक्रिया में, बिना किसी रुकावट या आवाज बदले अधिकृत शब्द 'कबड्डी-कबड्डी' का स्पष्ट और लगातार उच्चारण करना कॉन्ट कहलाता है। साँस टूटने को विधिक भाषा में कॉन्ट टूटना (Loosing Cant) कहते हैं।
- रेडर व एन्टी-रेडर (Raider & Anti-Raider): विपक्षी पाले में कॉन्ट के साथ प्रवेश करने वाले आक्रामक खिलाड़ी को रेडर कहते हैं। जिस पाले में रेड डाली जा रही है, उस दल के प्रत्येक जीवित खिलाड़ी को एन्टी-रेडर कहा जाता है।
- संघर्ष (Struggle) व परसुइट (Pursuit): जब रेडर का शारीरिक संपर्क किसी एन्टी-रेडर से होता है, तो उसे संघर्ष कहा जाता है, जिसके बाद लॉबी सक्रिय हो जाती है। जब कोई एन्टी-रेडर वापस जाते हुए रेडर को आउट करने के लिए पाला लांघकर तेजी से आक्रमण करता है, तो उसे परसुइट कहते हैं।
- लोना (Lona): यदि एक टीम विरोधी टीम के सभी सदस्यों को आउट कर देती है, तो उसे लोना मिलता है, जिसके 2 अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं।
- बंस अंक (Bonus Point): जब मैदान पर कम-से-कम 6 या 7 एन्टी-रेडर मौजूद हों और रेडर अपना एक पैर बोनस लाइन के पार हवा में या पूर्णतः टिका देता है, तो उसे 1 बोनस अंक मिलता है।
- टाइम आउट (Time Out): प्रत्येक दल प्रत्येक हाफ़ में 30-30 सेकंड के दो ऑफिशियल/टेक्निकल टाइम आउट कप्तान या कोच के आग्रह पर रेफरी की अनुमति से ले सकता है।
- टाई होने पर सडन डैथ नियम (Sudden Death): नॉक-आउट मैचों में अंक बराबर होने पर दोनों टीमें मैदान पर 7 खिलाड़ी रखती हैं। दोनों दलों को 5-5 रेड का विधिक अवसर मिलता है जो वॉक लाइन कम बोनस लाइन नियम पर खेला जाता है। इसके बाद भी टाई रहने पर सडन डैथ नियम लागू होता है, जिसमें जो भी दल पहला अग्रणी अंक (Leading Point) प्राप्त करता है, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है।
4. मौलिक कौशल, अधिकारी संकेत व 5 मुख्य फाउल (Skills & Fouls)
मौलिक आक्रामक कौशल: हाथ से छूना (Hand Touch), टांग बढ़ाना, दुलत्ती प्रहार (Kicking), बैक किक, साइड किक, झपट्टा मारना और टो-टच (Toe Touch)।
मौलिक रक्षात्मक कौशल: कलाई पकड़ना (Wrist Hold), जांघ पकड़ना (Thigh Hold), टखना पकड़ना (Ankle Hold), घुटना पकड़ना, चेन होल्ड और पीठ पकड़ना।
अधिकारी संकेत (Official Signals): कबड्डी मैच के सफल संचालन के लिए नियुक्त निर्णायक मुख्य रूप से 12 से 15 संकेतों का उपयोग करते हैं; यथा—मैच शुरू करने के लिए हाथ उठाना, लॉबी प्रवेश पर टांग उठाना, कोर्ट से बाहर जाने का इशारा, टाइम आउट के लिए 'टी' (T) बनाना, स्थानापन्न (Substitution) हेतु हाथों को आपस में घुमाना, बोनस हेतु अंगूठा ऊपर करना तथा ग्रीन (चेतावनी), येलो (अस्थायी निलंबन) व रेड (प्रतियोगिता से बाहर) कार्ड दिखाना।
5 मुख्य फाउल (Core Fouls):
- 1. कॉन्ट को दबाना: किसी भी विरोधी खिलाड़ी द्वारा रेडर के मुँह को दबाना या उसकी श्वास प्रक्रिया को हिंसात्मक रूप से बाधित करना फाउल है।
- 2. हिंसक शारीरिक क्षति: खेल के दौरान विपक्षी खिलाड़ी को चोट पहुँचाने के इरादे से नाखून मारना, थप्पड़ मारना या हिंसक व्यवहार करना।
- 3. टांगों की कैंची (Scissor Hold): रेडर के गले या धड़ पर खतरनाक तरीके से टांगों की कैंची मारकर उसे जकड़ना विधिक रूप से वर्जित है।
- 4. रेड भेजने में अत्यधिक विलंब: अपनी बारी आने पर यदि कोई टीम विरोधी पाले में रेडर भेजने के लिए 5 सेकंड से अधिक का समय लेती है।
- 5. बाह्य अनुशिक्षण (Coaching): मैच के दौरान खेल क्षेत्र के बाहर से प्रशिक्षकों या अतिरिक्त खिलाड़ियों द्वारा चिल्लाकर तकनीकी निर्देश देना फाउल की श्रेणी में आता है।
5. कबड्डी के विधिक व तकनीकी मापदंडों का सुस्पष्ट एकीकृत ढांचा
उत्तर लेखन की प्रामाणिकता और दृश्यता को पुख्ता करने के लिए कबड्डी के तकनीकी मापदंडों को नीचे एक सरल रॉ-तालिका (बिना किसी सीएसएस के) के माध्यम से संकलित किया गया है:
| क्र.सं. | कबड्डी के विधिक मापदंड घटक | पुरुष व जूनियर वर्ग (Senior Men) | महिला व सब-जूनियर वर्ग (Women) |
|---|---|---|---|
| 1 | मैदान का कुल परिमाप (Dimensions) | 13 मीटर × 10 मीटर | 12 मीटर × 8 मीटर |
| 2 | लॉबी की चौड़ाई (Lobby Width) | 1 मीटर (दोनों ओर) | 1 मीटर (दोनों ओर) |
| 3 | मध्य रेखा से वॉक लाइन (Baulk Line) | 3.75 मीटर | 3.00 मीटर |
| 4 | वॉक लाइन से बोनस लाइन (Bonus Line) | 1.00 मीटर | 1.00 मीटर |
| 5 | बोनस लाइन से अंत रेखा (End Line) | 1.75 मीटर | 2.00 मीटर |
| 6 | सिटिंग ब्लॉक का आकार (Sitting Block) | 8 मीटर × 1 मीटर | 6 मीटर × 1 मीटर |
6. प्रोग्रेसिव शिक्षक के लिए व्यावहारिक शैक्षिक निहितार्थ
बिहार के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के रचनावादी यथार्थ में एक प्रगतिशील शिक्षक को निम्नलिखित रणनीतियाँ अपनानी चाहिए:
- 3Rs के स्थान पर 7Rs पेडागोजी: कबड्डी के मैदान के विधिक मापों और अंकों की गणना (जैसे लोना व सडन डैथ नियम) को सिखाते समय शिक्षक को बच्चों को शुष्क रटंत प्रणाली के स्थान पर खेल-खेल में गणितीय, तार्किक और प्रोग्रेसिव 7Rs (Reading, Writing, Arithmetic, Right, Responsibility, Relationship, Recreation) के मार्ग पर ले जाना चाहिए।
- जेंडर रूढ़िवादिता का कड़ा प्रतिवाद (Deconstructing Gender Stereotypes): शिक्षक को खेल के मैदान पर यह कड़ाई से सुनिश्चित करना होगा कि कबड्डी जैसे कड़े और संघर्षपूर्ण खेल में लड़कियों और लड़कों दोनों को समान रूप से आक्रामक व रक्षात्मक कौशल प्रदर्शित करने, रेड डालने और टीम का नेतृत्व (Leadership) करने के बराबर लोकतांत्रिक अवसर मिलें।
- Evaluation का रचनात्मक प्रतिमान (CCE): इन कौशलों का मूल्यांकन लिखित परीक्षा से संभव नहीं है। शिक्षक को सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) के तहत खेल के दौरान बच्चों के व्यवहार, खेल भावना (Sportsmanship), आत्म-अनुशासन और सहयोग की भावना का सूक्ष्म अवलोकन (Observation) कर पोर्टफोलियो में दर्ज करना चाहिए।
7. निष्कर्ष (Conclusion)
कबड्डी खेल का इतिहास, क्षेत्रीय नाम, बर्लिन ओलम्पिक १९३६ व एशियन गेम्स की विकास यात्रा, तकनीकी शब्दावलियाँ (कॉन्ट, लोना, बोनस) तथा ५ मुख्य फाउल का यह सांगोपांग अध्ययन हमें यह अमूल्य चेतना प्रदान करता है कि "कबड्डी केवल शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह बच्चों के भीतर तीव्र चपलता, संवेगात्मक संतुलन, रणनीतिक सूझबूझ, अटूट आत्मविश्वास और सामूहिक सहकारिता गढ़ने की सर्वोत्कृष्ट रचनावादी शाला है"। जब एक भावी प्रोग्रेसिव शिक्षक खेल मैदान के इन नियमों को बाल-केंद्रित शिक्षाशास्त्र के साथ एकीकृत करता है, तभी समावेशी शिक्षा सफल होती है और एक सुदृढ़ प्रजातांत्रिक राष्ट्र की नींव मजबूत होती है।
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