यूरोपीय कंपनियों का आगमन: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं बिहार संदर्भ
यूरोपीय शक्तियाँ, व्यापारिक कंपनियाँ, कर्नाटक युद्ध और बिहार विशेष तथ्य — परीक्षा उपयोगी संपूर्ण नोट्स
1453 ई. में उस्मानी तुर्कों द्वारा कुस्तुनतुनिया (Constantinople) पर अधिकार कर लेने के बाद यूरोप और भारत के बीच का प्राचीन स्थल मार्ग बंद हो गया। पुनर्जागरण काल के भौगोलिक अन्वेषणों, दिशा-सूचक यंत्रों तथा स्पेन व पुर्तगाल के राजाओं के प्रोत्साहन से नए समुद्री मार्गों की खोज शुरू हुई। 1487 ई. में बार्थोलोम्यू डियाज ने 'केप ऑफ गुड होप' (उत्तमाशा अंतरीप) की खोज की।
⚡ Quick Revision Timeline
Constantinople
Cape of Good Hope
वास्को डि गामा
English Company
Dutch VOC
French Company
1. यूरोपीय कंपनियों के आगमन का क्रम एवं प्रमुख फैक्ट्रियाँ
⚠️ कंपनी स्थापना vs भारत आगमन क्रम
कंपनी स्थापना वर्ष: पुर्तगाली (1498) → ब्रिटिश (1600) → डच (1602) → डेनिश (1616) → फ्रांसीसी (1664)
भारत आगमन वर्ष: पुर्तगाली (1498) → डच (1596/1602) → अंग्रेज (1608) → डेनिश (1620) → फ्रांसीसी (1668)
पुर्तगाली → डच → अंग्रेज → डेनिश → फ्रांसीसी
2. प्रमुख यूरोपीय शक्तियाँ: विस्तार व नीतियाँ
आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष (कर्नाटक युद्ध)
| युद्ध | अवधि | मुख्य आधार / घटना | समाप्ति |
|---|---|---|---|
| प्रथम | 1746–1748 | ऑस्ट्रिया उत्तराधिकार युद्ध; सेंट थोमे | एक्स-ला-शैपेल (1748) |
| द्वितीय | 1749–1754 | हैदराबाद व कर्नाटक का उत्तराधिकार विवाद | पांडिचेरी (1754) |
| तृतीय | 1758–1763 | सप्तवर्षीय युद्ध; वांडीवाश (1760) | पेरिस (1763) |
3. बिहार में यूरोपीय कंपनियों का आगमन
बिहार अपने शोरा (Slatpetre), सूती वस्त्र, अफीम और अनाज के कारण यूरोपीय व्यापारियों का प्रमुख आकर्षण केंद्र था।
- बिहार में व्यापार करने वाले पहले यूरोपीय पुर्तगाली थे।
- हुगली से नावों द्वारा गंगा मार्ग से पटना आते थे।
- मसाले और चीनी मिट्टी के बर्तन लाते तथा सूती वस्त्र व शोरा ले जाते थे।
- 1632 ई. में पटना में पहली डच फैक्ट्री स्थापित हुई।
- मुख्य रुचि शोरा और सूती वस्त्रों के निर्यात में थी।
- 1620 ई. में पटना के आलमगंज में व्यापारिक केंद्र खोलने का प्रयास किया, जो 1621 में बंद हो गया।
- 1651 ई. में वास्तविक और स्थायी अंग्रेजी फैक्ट्री स्थापित हुई।
- पीटर मुंडी, जॉन मार्शल और टैवर्नियर ने पटना की व्यापारिक महत्ता का उल्लेख किया।
- 1770 ई. में 'रेवेन्यू काउंसिल ऑफ पटना' का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष जेम्स अलेक्जेंडर थे।
- 1774 ई. में डेनिश व्यापारियों ने पटना में व्यापारिक कोठी (फैक्ट्री) स्थापित की।
- व्यापारिक केंद्र मुख्य रूप से पटना के माल गोदाम क्षेत्र में था।
- 1757 के आसपास जीन लॉ इसका नेतृत्व कर रहा था।
- प्लासी के युद्ध के बाद अंग्रेजों ने फ्रांसीसियों को बिहार से निष्कासित कर दिया।
📚 बिहार में यूरोपीय कंपनियाँ — Quick Revision
⚡ One-Liner Quick Revision
- भारत आने वाले प्रथम यूरोपीय → पुर्तगाली
- भारत पहुंचने वाला प्रथम यूरोपीय → वास्को डि गामा
- भारत में प्रथम मुद्रणालय → गोवा, 1556 ई.
- भारत में पुर्तगाली सत्ता का वास्तविक संस्थापक → अल्बुकर्क
- Blue Water Policy → फ्रांसिस्को डी अल्मीडा
- VOC → डच ईस्ट इंडिया कंपनी
- English East India Company की स्थापना → 1600 ई.
- डचों की पटना फैक्ट्री → 1632 ई.
- अंग्रेजों की स्थायी पटना फैक्ट्री → 1651 ई.
- डेनिश फैक्ट्री, पटना → 1774 ई.
- वांडीवाश का युद्ध → 1760 ई.
- फर्रुखसियर का फरमान → 1717 ई.
⚠️ Exam Alert: Confusing Facts
हमेशा कंपनी की स्थापना और भारत में उसके आगमन/व्यापारिक गतिविधि के वर्ष को अलग-अलग याद रखें। MCQ में यही सबसे सामान्य भ्रम पैदा करता है।
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