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यूरोपीय कंपनियों का आगमन: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं बिहार संदर्भ

यूरोपीय शक्तियाँ, व्यापारिक कंपनियाँ, कर्नाटक युद्ध और बिहार विशेष तथ्य — परीक्षा उपयोगी संपूर्ण नोट्स

📌 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1453 ई. में उस्मानी तुर्कों द्वारा कुस्तुनतुनिया (Constantinople) पर अधिकार कर लेने के बाद यूरोप और भारत के बीच का प्राचीन स्थल मार्ग बंद हो गया। पुनर्जागरण काल के भौगोलिक अन्वेषणों, दिशा-सूचक यंत्रों तथा स्पेन व पुर्तगाल के राजाओं के प्रोत्साहन से नए समुद्री मार्गों की खोज शुरू हुई। 1487 ई. में बार्थोलोम्यू डियाज ने 'केप ऑफ गुड होप' (उत्तमाशा अंतरीप) की खोज की।

⚡ Quick Revision Timeline

1453
Constantinople
1487
Cape of Good Hope
1498
वास्को डि गामा
1600
English Company
1602
Dutch VOC
1664
French Company

1. यूरोपीय कंपनियों के आगमन का क्रम एवं प्रमुख फैक्ट्रियाँ

क्रम यूरोपीय शक्ति आगमन वर्ष कंपनी का मूल नाम प्रथम स्थायी फैक्ट्री / मुख्यालय
1 पुर्तगाली 1498 ई. एस्तादो दा इंडिया कोचीन (1503 ई.), केरल
2 डच 1596 / 1602 ई. VOC मसूलीपट्टनम (1605 ई.)
3 अंग्रेज 1600 / 1608 ई. Governor and Company of Merchants of London... सूरत (1613 ई. स्थायी)
4 डेनिश 1616 ई. डेंस ओस्टइंडिस्क कोम्पाग्नी ट्रैंकोबार (1620 ई.), तमिलनाडु
5 फ्रांसीसी 1664 ई. Compagnie des Indes सूरत (1668 ई.)

⚠️ कंपनी स्थापना vs भारत आगमन क्रम

कंपनी स्थापना वर्ष: पुर्तगाली (1498) → ब्रिटिश (1600) → डच (1602) → डेनिश (1616) → फ्रांसीसी (1664)

भारत आगमन वर्ष: पुर्तगाली (1498) → डच (1596/1602) → अंग्रेज (1608) → डेनिश (1620) → फ्रांसीसी (1668)

🧠 याद रखने का क्रम: पु – ड – अं – डे – फ्रां
पुर्तगाली → डच → अंग्रेज → डेनिश → फ्रांसीसी

2. प्रमुख यूरोपीय शक्तियाँ: विस्तार व नीतियाँ

🇵🇹 पुर्तगाली शक्ति
  • वास्को डि गामा: 17 मई 1498 को गुजराती पथ-प्रदर्शक अब्दुल मनीद की सहायता से कालीकट बंदरगाह पहुंचा। वहाँ के हिंदू शासक जमोरिन ने स्वागत किया। काली मिर्च के व्यापार से 60 गुना मुनाफा कमाया।
  • फ्रांसिस्को डी अल्मीडा (1505–1509 ई.): प्रथम पुर्तगाली गवर्नर। हिंद महासागर में व्यापारिक एकाधिकार हेतु शांत जल की नीति (Blue Water Policy) चलाई।
  • अल्फांसो डी अल्बुकर्क (1509–1515 ई.): भारत में पुर्तगाली सत्ता का वास्तविक संस्थापक। 1510 ई. में गोवा पर अधिकार किया तथा भारतीय स्त्रियों से विवाह को प्रोत्साहित किया।
  • नीनो डी कुन्हा (1529–1538 ई.): 1530 ई. में राजधानी कोचीन से गोवा स्थानांतरित की तथा हुगली और दीव में बस्तियां बसाईं।
  • कार्टाज-आर्मेडा-काफिला व्यवस्था: जहाजों से टैक्स/पास (कार्टाज) वसूलने की समुद्री एकाधिकार प्रणाली।
  • पुर्तगालियों की देन: प्रिंटिंग प्रेस (1556 ई., गोवा), तंबाकू, लाल मिर्च, पपीता, आलू, काजू तथा गोथिक स्थापत्य कला की शुरुआत।
🇳🇱 डच शक्ति
  • मुख्य ध्यान इंडोनेशियाई द्वीपसमूह तथा भारत से सूती वस्त्र निर्यात पर था।
  • भारतीय वस्त्रों को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रमुख वस्तु बनाने का श्रेय डचों को जाता है।
  • पतन: 1759 ई. के बेदारा के युद्ध में अंग्रेजों ने डचों को निर्णायक रूप से पराजित किया।
🇬🇧 ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी
  • 31 दिसंबर 1600: महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने 15 वर्षों के व्यापारिक एकाधिकार का शाही चार्टर दिया।
  • 1608: कैप्टन हॉकिन्स 'हेक्टर' जहाज से जहांगीर के दरबार में पहुंचा; उसे 400 का मनसब और 'इंग्लिश खां' की उपाधि दी गई।
  • 1615: सर थॉमस रो जहांगीर के दरबार में आया और व्यापारिक छूट प्राप्त की।
  • गोलकुंडा का सुनहरा फरमान (1632): 500 पगोडा वार्षिक कर के बदले बंदरगाहों से मुक्त व्यापार की अनुमति।
  • बंबई का अधिग्रहण (1668): कैथरीन ऑफ ब्रैगेंजा के विवाह के उपरांत बंबई ब्रिटिश सम्राट चार्ल्स द्वितीय को मिला, जिसने इसे कंपनी को किराये पर दिया।
  • फोर्ट विलियम: 1698 में सुतानाती, कालीकाता और गोविंदपुर की जमींदारी से संबंधित विवरण; 1700 में चार्ल्स आयर प्रथम प्रेसिडेंट बने।
  • फर्रुखसियर का फरमान (1717): जॉन सुरमन मिशन द्वारा बंगाल में सीमा शुल्क मुक्त व्यापार व सिक्के ढालने का अधिकार मिला; इसे कंपनी का 'मैग्नाकार्टा' कहा गया।
🇫🇷 फ्रांसीसी शक्ति
  • 1664 ई.: लुई चौदहवें के मंत्री कोलबर्ट के प्रयासों से कंपनी स्थापित हुई।
  • 1673 ई.: फ्रैंको मार्टिन ने पुदुचेरी गांव प्राप्त कर पांडिचेरी की नींव रखी।

आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष (कर्नाटक युद्ध)

युद्ध अवधि मुख्य आधार / घटना समाप्ति
प्रथम 1746–1748 ऑस्ट्रिया उत्तराधिकार युद्ध; सेंट थोमे एक्स-ला-शैपेल (1748)
द्वितीय 1749–1754 हैदराबाद व कर्नाटक का उत्तराधिकार विवाद पांडिचेरी (1754)
तृतीय 1758–1763 सप्तवर्षीय युद्ध; वांडीवाश (1760) पेरिस (1763)
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3. बिहार में यूरोपीय कंपनियों का आगमन

बिहार अपने शोरा (Slatpetre), सूती वस्त्र, अफीम और अनाज के कारण यूरोपीय व्यापारियों का प्रमुख आकर्षण केंद्र था।

🇵🇹 पुर्तगाली
  • बिहार में व्यापार करने वाले पहले यूरोपीय पुर्तगाली थे।
  • हुगली से नावों द्वारा गंगा मार्ग से पटना आते थे।
  • मसाले और चीनी मिट्टी के बर्तन लाते तथा सूती वस्त्र व शोरा ले जाते थे।
🇳🇱 डच
  • 1632 ई. में पटना में पहली डच फैक्ट्री स्थापित हुई।
  • मुख्य रुचि शोरा और सूती वस्त्रों के निर्यात में थी।
🇬🇧 अंग्रेज
  • 1620 ई. में पटना के आलमगंज में व्यापारिक केंद्र खोलने का प्रयास किया, जो 1621 में बंद हो गया।
  • 1651 ई. में वास्तविक और स्थायी अंग्रेजी फैक्ट्री स्थापित हुई।
  • पीटर मुंडी, जॉन मार्शल और टैवर्नियर ने पटना की व्यापारिक महत्ता का उल्लेख किया।
  • 1770 ई. में 'रेवेन्यू काउंसिल ऑफ पटना' का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष जेम्स अलेक्जेंडर थे।
🇩🇰 डेनिश
  • 1774 ई. में डेनिश व्यापारियों ने पटना में व्यापारिक कोठी (फैक्ट्री) स्थापित की।
🇫🇷 फ्रांसीसी
  • व्यापारिक केंद्र मुख्य रूप से पटना के माल गोदाम क्षेत्र में था।
  • 1757 के आसपास जीन लॉ इसका नेतृत्व कर रहा था।
  • प्लासी के युद्ध के बाद अंग्रेजों ने फ्रांसीसियों को बिहार से निष्कासित कर दिया।

📚 बिहार में यूरोपीय कंपनियाँ — Quick Revision

कंपनी बिहार/पटना से संबंधित प्रमुख तथ्य मुख्य व्यापार
पुर्तगाली प्रथम यूरोपीय व्यापारी सूती वस्त्र, शोरा
डच पटना फैक्ट्री, 1632 शोरा, वस्त्र
अंग्रेज स्थायी फैक्ट्री, 1651 व्यापारिक केंद्र
डेनिश व्यापारिक कोठी, 1774 व्यापार
फ्रांसीसी माल गोदाम क्षेत्र; जीन लॉ व्यापारिक गतिविधियाँ

⚡ One-Liner Quick Revision

  • भारत आने वाले प्रथम यूरोपीय → पुर्तगाली
  • भारत पहुंचने वाला प्रथम यूरोपीय → वास्को डि गामा
  • भारत में प्रथम मुद्रणालय → गोवा, 1556 ई.
  • भारत में पुर्तगाली सत्ता का वास्तविक संस्थापक → अल्बुकर्क
  • Blue Water Policy → फ्रांसिस्को डी अल्मीडा
  • VOC → डच ईस्ट इंडिया कंपनी
  • English East India Company की स्थापना → 1600 ई.
  • डचों की पटना फैक्ट्री → 1632 ई.
  • अंग्रेजों की स्थायी पटना फैक्ट्री → 1651 ई.
  • डेनिश फैक्ट्री, पटना → 1774 ई.
  • वांडीवाश का युद्ध → 1760 ई.
  • फर्रुखसियर का फरमान → 1717 ई.

⚠️ Exam Alert: Confusing Facts

हमेशा कंपनी की स्थापना और भारत में उसके आगमन/व्यापारिक गतिविधि के वर्ष को अलग-अलग याद रखें। MCQ में यही सबसे सामान्य भ्रम पैदा करता है।